जाने ये कैसी
विडम्बना है आई…
भाई के गर्दन पर…
कटारी फेर रहा है भाई ,
घर कि #आबरू नीलाम
कर रहे बनकर शराबी और जुआरी…
हे ईश्वर तुम तो हो ,
करुणा के सागर ,
करुणा के पट अपने तुम खोलो…
क्यो बैठे हो मौन तुम यू, कुछ तो बोलो
दो पता एक ऐसे स्थान का मुझे
जहाँ मै मन कि जलन मिटाऊँ….
एक तुमसे ही है आस अब सिवाय
तुम्हारे और कहाँ मै जाऊं ….!!
🍁#Sansकृति …✍





