…विडम्बना !!

जाने ये कैसी
विडम्बना है आई…

भाई के गर्दन पर…

कटारी फेर रहा है भाई ,

घर कि #आबरू नीलाम

कर रहे बनकर शराबी और जुआरी…

हे ईश्वर तुम तो हो ,

करुणा के सागर ,

करुणा के पट अपने तुम खोलो…

क्यो बैठे हो मौन तुम यू, कुछ तो बोलो

दो पता एक ऐसे स्थान का मुझे

जहाँ मै मन कि जलन मिटाऊँ….

एक तुमसे ही है आस अब सिवाय

तुम्हारे और कहाँ मै जाऊं ….!!

🍁#Sansकृति …✍

!! असीमित प्रेम !!

था असीमित ये प्रेम तभ भी ,
है असीमित ये प्रेम अब भी …❤

फर्क सिर्फ इतना है ~~

कि तब जताया करती थी 😍

और अब ~~
उन्हीं पलों को याद करके 😍

अश्रुओं के मोती बहाकर उन्हे

यादों के धागों मे पिरोया करती हूँ …😊

🍁#Sansकृति …✍

!! माँ…❣…बेटी !!

#माँ_बेटी …❤

एक ऐसा खट्टा मीठा रिश्ता …
जहाँ हल्की फुल्की नोक-झोक भी है ,
साथ ही #बेस्ट_फ्रेंड्स वाले जज़्बात भी !

बेहद खास होता है रिश्ता ,

एक माँ का उसकी बेटी के संग,

जिसके रूप मे हर माँ …

एक बार फिर से जी लेती है

अपना बचपन … 😍

🍁#Sansकृति ….✍

प्रकृति…!!

परमात्मा ने तेरी तृप्ति को
…..है मेरा सृजन किया

मैने तो सदा प्रम दिया बदले

ईसके तूने अहंकार किया ….

अब क्या देख रहा मानुष…

तूने मेरा नहीं खुद के ही हाथो

है अपना संघार किया !!

🍁…..Sansकृति ✍

#संग महबूब का !

नाये चाँद लगे कभी
ईतने खूबसूरत हमे…

ना ही लगे कभी
ये टिमटिमाते सितारे…

ना ये वादियां लगी

कभी ईतने हसीन हमे…

ना ही लगे कभी

ये हसीन ये नजारे…

खूबसूरत तो आज

लगा ये शमा हमे …

जब है संग

आज महबूब हमारे !!

#Sansकृति…✍❣