दास्तान-ए-मोहब्बत …✍

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चाहे कहाँ ना था कभी लब से तुमने,

ख़ामोशियों से तुम्हारे सुना हाल-ए-दिल हमने!

चुप चुप कर तुम्हारा मुझसे यू प्यार करना,
तुम्हारे इसी अदा ने तो मेरे दिल को लुभाया!

और फिर जुड़े तुम ईस कदर मुझसे,

जैसे होती है जुडी एक साया!

मिलकर तुमसे मुझे पता मेरी खुशियों,

का मिल गया!

जैसे अंजानी सी राहों पर मुझसे मेरा,

खुदा टकराया!

ना जाना तुम दूर मुझसे कभी,

है तुम्हे उस रब दा वास्ता!

तुम्हारे ही दम से तो होगी पूरी,

ये हमारे प्यार कि दास्तान !!

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🍁🍁#$ãń$कृति ✍😍

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