प्रकृति…!!

परमात्मा ने तेरी तृप्ति को
…..है मेरा सृजन किया

मैने तो सदा प्रम दिया बदले

ईसके तूने अहंकार किया ….

अब क्या देख रहा मानुष…

तूने मेरा नहीं खुद के ही हाथो

है अपना संघार किया !!

🍁…..Sansकृति ✍

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